Tuesday, July 28, 2026

 धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफ़े के बाद कुछ बातें…

सबसे पहले, उन सभी छात्रों को बधाई जिन्होंने अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुँचाई। किसी भी लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए और इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित भी किया।

लेकिन इस पूरे आंदोलन के दौरान कुछ बातें ऐसी भी सामने आईं, जिन्होंने मन को सोचने पर मजबूर कर दिया।

मैं उन अभिभावकों की पीढ़ी से हूँ, जिन्हें आज की पीढ़ी Millennials कहती है। हमने पूरी कोशिश की कि अपने बच्चों को अच्छे संस्कार, ईमानदारी, धैर्य और मेहनत का महत्व सिखा सकें। फिर भी, कहीं-न-कहीं ऐसा लगता है कि हम कुछ मामलों में सफल नहीं हो पाए।

आज की पीढ़ी प्रतिभाशाली है, आत्मविश्वासी है और अपनी बात खुलकर कहती है। यह उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन साथ ही, एक चिंता भी दिखाई देती है—सब कुछ बहुत जल्दी पाने की इच्छा। जबकि जीवन का सच यह है कि हर बड़ी सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दुनिया के हर सफल व्यक्ति की अपनी संघर्षगाथा होती है। सम्मान, पहचान और सफलता मेहनत, धैर्य और ईमानदारी से ही मिलती है।

जीवन हमेशा हमें दो रास्ते देता है। पहला रास्ता कठिन होता है—संघर्ष, धैर्य और परिश्रम का। दूसरा रास्ता आसान दिखता है—शॉर्टकट, अनैतिक साधनों और गलत तरीकों का। निर्णय हमें करना होता है कि हम कौन-सा रास्ता चुनेंगे।

अब मैं आप सबसे एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ।

क्या आप और आपके माता-पिता यह संकल्प ले सकते हैं कि जीवन में कभी भी किसी परीक्षा, किसी सरकारी काम या किसी भी लाभ के लिए भ्रष्टाचार का सहारा नहीं लेंगे? न पेपर खरीदेंगे, न खरीदने देंगे, न किसी अनुचित तरीके से सफलता पाने की कोशिश करेंगे।

NEET पेपर लीक जैसे मामलों में जिन लोगों ने प्रश्नपत्र खरीदे, क्या उन्होंने कभी यह सोचा कि यदि उनका बच्चा इस तरह डॉक्टर बन भी गया, तो वह किस प्रकार का डॉक्टर बनेगा? क्या मरीज के मन में कभी यह शंका नहीं आएगी कि उसका इलाज करने वाला डॉक्टर अपनी मेहनत से यहाँ पहुँचा है या किसी पेपर लीक की वजह से?

यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। यह समाज के विश्वास का प्रश्न है।

कुछ लोगों की बेईमानी की कीमत लाखों मेहनती छात्रों ने चुकाई। कई परिवार टूट गए, अनेक बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ और समाज का भरोसा भी कमजोर हुआ। यह किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है।

हम अक्सर हर समस्या का समाधान सरकार से चाहते हैं। लेकिन सच यह है कि सरकार अकेले भ्रष्टाचार समाप्त नहीं कर सकती। जब तक समाज स्वयं ईमानदारी का साथ नहीं देगा, तब तक कोई भी कानून पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।

अगर खरीदने वाले ही नहीं होंगे, तो बेचने वाले अपने-आप खत्म हो जाएंगे।

आज समय आ गया है कि हम केवल सरकार से प्रश्न न करें, बल्कि स्वयं से भी प्रश्न करें। क्या हम अपने बच्चों को केवल सफल बनाना चाहते हैं, या एक अच्छा और ईमानदार इंसान भी बनाना चाहते हैं?

पहले कहा जाता था—“जैसा राजा, वैसी प्रजा।” लेकिन आज यह कहना अधिक उचित होगा—“जैसी प्रजा, वैसा राजा।” क्योंकि लोकतंत्र में सरकार भी उसी समाज का प्रतिबिंब होती है।

आज मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहती हूँ कि आपके पास देश को बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि आप यह संकल्प ले लें कि न कभी भ्रष्टाचार करेंगे, न उसे स्वीकार करेंगे और न ही उसे छिपाएँगे। यदि कभी आपको किसी परीक्षा का पेपर खरीदने, किसी गलत तरीके से लाभ लेने या किसी भ्रष्टाचार का प्रस्ताव मिले, तो उसे ठुकराइए और उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दीजिए। यही सच्ची देशभक्ति है। यही आपकी मेहनत, आपके भविष्य और लाखों अन्य छात्रों के सपनों की रक्षा करेगा।

आइए, आज हम सब मिलकर यह प्रण लें कि सफलता चाहे देर से मिले, लेकिन ईमानदारी और मेहनत के रास्ते से ही मिले।

यही एक मजबूत समाज, सुरक्षित भविष्य और सशक्त भारत की नींव है।




Tuesday, July 21, 2026





 

Sunday, May 10, 2026


Happy Mother's Day





 

Friday, March 27, 2026


Happy Navratri Day - 9






 

Thursday, March 26, 2026


Happy Navratri Day - 8







 

Wednesday, March 25, 2026


Happy Navratri Day - 7






 

Monday, March 23, 2026




 



Happy Navratri Dy - 6






 



Happy Navratri Day - 5






 

Sunday, March 22, 2026


Happy Navratri Day - 4






 

Saturday, March 21, 2026





 


Happy Navratri Dau - 3








 

Friday, March 20, 2026


Happy Navratri

Day - 2








 

Thursday, March 19, 2026


Happy Navratri










 

Sunday, March 8, 2026




Happy Wome's Day



 

Tuesday, March 3, 2026




Happy Holi 2026





 

Tuesday, February 24, 2026

DEVELOPMENT - विकास 


ये क्या कर रहे हो ? इन पौधों को क्यों उखाड़ रहे हो ?

ये मेरे रास्ते में अटक रहे हैं। मैं रास्ता चौड़ा व पक्का करना चाहता हूँ जिससे रास्ता दिखने में सुन्दर लगे और मुझे साइकिल चलाने में आसानी हो तथा लोग भी आराम से आ-जा सकें। 

वो तो ठीक है लेकिन इन्हें यहाँ से उखाड़ने से पहले इन्हें कहीं दूसरी जगह लगाने का इंतजाम तो करो। इन जिन्दा हरे-भरे पौधों को इनकी जगह से उखाड़ कर क्यों मार देना चाहते हो ? 

तुम्हें किसी भी बदलाव के लिए उसका विकल्प भी अवशय प्रस्तुत करना चाहिए।  

 ENCOURAGMENT, APPRECIATION - प्रोत्साहन 


अरे ! आंटी जी ये सब क्या फैला रखा है ? कुछ काम चल रहा है क्या ?

हाँ बेटा। तेरे अंकल जी अपनी अलमारी दुबारा बनवा रहे हैं। इतने सारे सम्मान, तस्वीरें, उपहार आदि हो गए हैं अब अलमारी छोटी पड़ने लगी है। 

हाँ ये बात तो है। अंकल जी हैं ही इतने बड़े कलाकार। पर आप बुरा न माने तो एक बात कहूँ अगर अंकल जी हम जैसे युवा वर्ग को भी आगे बढ़ने का अवसर दें तो एक अलमारी हम भी अपने यहां बनवा लें। इतनी योग्यता तो हम सब में भी है। 

कई लोगों द्वारा दुनिया भर की प्रसिद्धि और सम्मान प्राप्त करने के बाद भी अपनी जगह छोड़ पाना नामुमकिन है और शायद इसी कारण से अनेकों योग्य लोग आगे नहीं आ पाते और कहीं अपनी प्रतिभा के साथ गुमनामी के अँधेरे में खो जाते हैं। 

अपनी कुर्सी छोड़ दूसरे लोगों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा कलेजा चाहिए। 


Saturday, February 14, 2026



pulwama 14th february 2019


 

Thursday, January 22, 2026

 समाधान 

एक आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की जद्दोजहद में लगा रहता है और एक सकून भरी जिंदगी जीने के लिए के लिए टैक्स देता है और सरकार या महकमों से बेसिक सुविधाओं की आशा करता है। ये सुविधाएं वो कोई मुफ्त में नहीं लेता बल्कि उसका पूरा खर्चा भी टैक्स के रूप में खुद ही वहन करता है। इस टैक्स से ही इन महकमों में काम कर रहे लोग मोटी -मोटी तनख्वाहें लेते हैं। हमारे यहाँ कोई भी काम या किसी भी शिकायत की सुनवाई कोई न कोई बड़ी दुर्घटना के बाद ही होती है और उस सबका खामियाजा भी इसी टैक्सपेयर को अपनी जान-माल के नुक्सान से ही चुकाना पड़ता है। 

इन महकमों में काम कर रहे लोगों की ऐसी क्या मानसिकता है कि इनके कान पर कोई जूँ ही नहीं रेंगती और मजे की बात ये कि ये किसी बड़ी दुर्घटना के बाद भी नहीं जागते। पता नहीं किस बात का इन्तजार करते हैं ? 

हाल ही में भोपाल की सोसाइटी की लिफ्ट में हुई दुर्घटना व नोएडा की घटना इसका जीता जागता उदहारण है। पहले हुए हादसे की शिकायत लोगों द्वारा की जा चुकी थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नोएडा में हुए हादसे के समय  महकमें के सभी लोग दुर्घटना स्थल पर मौजूद थे पर कोई भी समाधान न निकाल पाए और बड़े ही सहज तरीके से सब कुछ घटित होते देखते रहे। 

किसी दूर दराज इलाके में संसाधनों की कमी या अन्य किसी कारण के कभी-कभी ऐसा हादसा हो जाता है लेकिन चमकती दमकती देश की राजधानी में ऐसा हादसा सिर्फ इन महकमों की लापरवाही ही दिखाता है। 

इस हादसे के साथ ही इन गगनचुम्बी ईमारतों में करोड़ों के माचिस की डिब्बी जैसे मकानों में रह रहे इन टैक्सपेयर व आम आदमी की क्या हालत है और उसकी जान कितनी सस्ती है ये कड़वी सच्चाई भी सामने आ गयी है। 

कभी मेट्रो, लिफ्ट,आगजनी, पानी, सड़क पर होने वाले हादसे, प्राकृतिक आपदाओं, अचानक हार्ट अटैक या इस प्रकार की किसी भी परिस्थिति या हादसों से बचने के लिए लोगों को कुछ बेसिक कौशल जैसे-तैराकी,फर्स्ट ऐड, साधारण टूल्स आदि का प्रयोग सीखना ही चाहिए। जिससे ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति किसी बाहरी सहायता का इंतज़ार न करे और समय रहते अपने साथ ही दूसरों की जान भी बचा सके। 

सरकारों को भी समाज में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को डिजास्टर मैनेजमेंट या आपदा प्रबंधन की बेसिक जानकारी तो अवशय देनी चाहिए। ऐसे हादसों से बचने के लिए स्कूलों व कॉलेज में ट्रेनिंग मिलनी चाहिए और इसे मेंडेटरी कर देना चाहिए व समय-समय पर इन हादसों में जान बचाने वाले लोगों को अपने अनुभव शेयर करने के लिए संस्थानों, सोसाइटी, पब्लिक प्लेसेस आदि में  बुलाना चाहिए व साथ ही  मॉक ड्रिल भी होनी चाहियें। 

इन हादसों से बचने के लिए महकमें के लोगों को जनता द्वारा मिली शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही करना चाहिए और सबसे बड़ी बात जान बचाने वाले किसी भी विशेष अधिकारी या व्यक्ति को आम जनता के बीच सम्मानित किया जाना चाहिए जिससे अन्य लोग भी उनके अनुभवों से कुछ सीख सकें। 

वैसे तो विपत्ति के समय संयम, चतुरता, अनुभव, साहस, विवेक और ज्ञान जैसे गुण ही व्यक्ति के सच्चे दोस्त होते हैं जो हर कठिन परिस्थिति में मनुष्य का साथ निभाते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।