“रतन नवल टाटा”
( १९३७ -२०२४ )
महान सरल विनम्र व दूरदर्शी व्यक्तित्व
मुट्ठी भर जो लाया था संग अपने
ऐ देश तुझे…अर्पण कर दिया
जीवन जिया स्वाभिमान से मैंने
ले अब तन भी तेरे सुपुर्द कर दिया ।
रतन जी ने अपने दादा जमशेद जी टाटा की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए उद्योग में नैतिकता और मानवता का संचारकिया। इन्होंने न केवल व्यवसाय के क्षेत्र में बल्कि समाज के हर पहलू पर अमिट छाप छोड़ी।
इनके नेतृत्व में टाटा समूह ने प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम, सूचना और ऑटोमोबाइल जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तार किया।
रत्न टाटा का दृष्टिकोण हमेशा नैतिकता और मानवता पर केंद्रित रहा जिससे इन्होंने टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर एकविश्वसनीय और सम्मानित ब्रांड बना दिया रतन जी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कईयोजनाएं प्रारंभ कीं जिनका लोगों के जीवन पर अत्यंत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ा।उनका मानना था कि हमें व्यापार से केवल मुनाफा ही नहीं कमाना चाहिए बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के विकास वउत्थान के लिए भी कार्य करना चाहिए। उन्होंने हमेशा अपने कर्मचारियों और समुदायों के कल्याण के लिए
प्रयत्नशील रहते हुए यह सिद्ध कर दिया कि एक जिम्मेदार नेता कैसे समाज में
बदलाव ला सकता है।
रत्न टाटा जी को मानव के प्रति संवेदना, दयालुता, विनम्रता व दूरदर्शी सोच जैसे गुणों ने एक प्रेरणादायक नेता बना दियाजिसने हमेशा समाज के कमजोर, पिछले व गरीब वर्ग के उत्थान के लिए प्रयास किए।
उनका निधन निस्संदेह भारतीय उद्योग के लिए एक अपूर्णीय क्षति है, लेकिन नकी विरासत, विचार, और कार्य हमें आगेबढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। हम सभी उनके योगदान को कभी नहीं भुला पायेंगे और वे हमेशा हमारे
रत्न टाटा जी को मानव के प्रति संवेदना, दयालुता, विनम्रता व दूरदर्शी सोच जैसे गुणों ने एक प्रेरणादायक नेता बना दियाजिसने हमेशा समाज के कमजोर, पिछले व गरीब वर्ग के उत्थान के लिए प्रयास किए।
उनका निधन निस्संदेह भारतीय उद्योग के लिए एक अपूर्णीय क्षति है, लेकिन नकी विरासत, विचार, और कार्य हमें आगेबढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। हम सभी उनके योगदान को कभी नहीं भुला पायेंगे और वे हमेशा हमारे
दिलों में जीवित रहेंगे रत्न जी टाटा का जीवन यह दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने सिद्धांतों और नैतिकता के साथ न केवल व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकता है बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दे सकता है।
