Thursday, October 10, 2024


रतन नवल टाटा

१९३७ -२०२४ )

महान सरल विनम्र  दूरदर्शी व्यक्तित्व 


मुट्ठी भर जो लाया था संग अपने 

 देश तुझेअर्पण कर दिया 

जीवन जिया स्वाभिमान से मैंने 

ले अब तन भी तेरे सुपुर्द कर दिया 


भारतीय उद्योग के स्तंभरत्न जी टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था।अपने जीवन और कार्यों के माध्यम सेरतन जी ने  केवल टाटा समूह को   ऊँचाईयों पर पहुँचाया बल्कि देश की औद्योगिक पहचान को भी सशक्त किया .उनकासम्पूर्ण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
रतन जी ने अपने दादा जमशेद जी टाटा की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए   उद्योग में नैतिकता  और मानवता का संचारकिया। इन्होंने  केवल व्यवसाय के क्षेत्र में बल्कि समाज के हर पहलू पर अमिट                 छाप छोड़ी। 
इनके नेतृत्व में टाटा समूह ने प्रौद्योगिकीटेलीकॉमसूचना और ऑटोमोबाइल  जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तार किया।
रत्न टाटा का दृष्टिकोण हमेशा नैतिकता और मानवता पर केंद्रित रहा  जिससे इन्होंने टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर एकविश्वसनीय और सम्मानित       ब्रांड बना दिया रतन जी ने शिक्षास्वास्थ्यऔर महिला सशक्तिकरण      जैसे क्षेत्रों में कईयोजनाएं प्रारंभ कीं जिनका लोगों के जीवन पर अत्यंत ही सकारात्मक   प्रभाव पड़ा।उनका मानना था कि हमें व्यापार से केवल मुनाफा ही नहीं कमाना               चाहिए बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के विकास उत्थान के लिए भी कार्य           करना चाहिए। उन्होंने हमेशा अपने कर्मचारियों और समुदायों के कल्याण के लिए  
प्रयत्नशील रहते हुए यह सिद्ध कर दिया कि एक जिम्मेदार नेता कैसे समाज में 
बदलाव ला सकता है। 
रत्न टाटा जी को मानव के प्रति संवेदनादयालुताविनम्रता  दूरदर्शी सोच               जैसे गुणों ने एक प्रेरणादायक नेता बना दियाजिसने हमेशा समाज के कमजोर,   पिछले  गरीब वर्ग के   उत्थान के लिए प्रयास किए। 
उनका निधन निस्संदेह भारतीय उद्योग के लिए एक अपूर्णीय क्षति हैलेकिन   नकी विरासत,  विचारऔर कार्य हमें आगेबढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। हम सभी उनके योगदान को कभी नहीं भुला पायेंगे और वे हमेशा हमारे 

दिलों में जीवित रहेंगे रत्न जी टाटा का जीवन यह दर्शाता है कि कैसे एक                          व्यक्ति  अपने सिद्धांतों और नैतिकता के साथ  केवल व्यवसाय में               सफलता प्राप्त कर सकता है बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दे सकता है।