बच्चों में तनाव
आजकल हर समय तनाव में होना सिर्फ वयस्कों की समस्या ही नहीं है बल्कि अब रोजमर्रा की जिंदगी में बच्चे भी इससे झूझ रहे हैं। अपने स्कूल, अपनी दोस्ती , शारीरिक बदलाव या घर परिवार में होने वाली घटनाओं के कारण भी बच्चे तनाव में रहते हैं। आजकल स्ट्रेस या तनाव बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन उनके लिए इससे निबटना बेहद कठिन होता है व इसके बारे में बच्चे जानते ही नहीं और न वो ये जानते हैं कि इसके बारे में कैसे बताया जाए व इससे निजात पाने के लिए किसकी सहायता ली जाए। हम उनके व्यवहार में होने वाले कुछ बदलावों या संकेतों से पता लगा सकते हैं कि बच्चा तनावग्रसित है व समय रहते उनकी व्यावहारिक व वास्तविक सहायता कर सकते हैं।
बहुत बार बच्चों में तनावग्रसित होने पर ये मुख्या संकेत देखने को मिलते हैं जैसे कि -
शारीरिक प्रतिक्रिया - तनाव में होने पर उनका शरीर विभिन्न प्रकार से प्रतिक्रिया करता है। वो कभी नाखून चबाते हैं, कभी अपनी मुठ्ठी भीचते हैं या फिर पेट दर्द की शिकायत करते हुए मिलते हैं। तनाव उनके शरीर को भी प्रभावित करता है वा उनके स्वास्थय पर प्रभाव डालता है।
एकाग्रता में कमी - किसी भी काम पर फोकस न कर पाना, किसी भी चीज या होमवर्क को बहुत देर तक एकटक देखते रहना और रोजमर्रा के आसान से कार्यों को भी समय पर पूरा न कर पाना या अपने दिमाग पर ये सोच हावी कर लेना कि- मैं इस काम को नहीं कर सकता।
भावनात्मक रूप से कमजोर होना - बच्चा बहुत सारी बातों को भावनाओं के आवेग में आकर खुद को संभाल नहीं पता व छोटी-छोटी बातों पर रोने लगता है। किसी की भी कही गयी बात को वो मन पर लगा लेता है और उस बारे में अपनी प्रतिक्रिया वो अपने रोने से प्रदर्शित करता है। असल में उनकी भावनाएँ उन पर हावी हो जाती हैं।
गुस्सा या आक्रोश - अपने घर या स्कूल में बहुत गुस्से में रहने लगते हैं। छोटी-छोटी बात पर अपने भाई बहनों या दोस्तों पर क्रोधित हो जाते हैं , टीम या ग्रुप में किसी भी काम में सहमति न होने पर दूसरों पर चिल्लाना या दूसरों के पॉइंट को न समझना।
बहाने ढँढ़ना व शिकायतें करना - काम को न करने के बहाने ढूँढ़ते हैं। स्कूल न जाने के लिए नए बहाने करते हैं। किसी एग्जाम या खेल के लिए शिकायत करना कि मेरा सर दर्द है या मैं बीमार हूँ आदि। कह सकते हैं कि बच्चे का किसी भी काम में मन ही नहीं लगता और अपनी इस समस्या से वह अनजाने में अकेले ही झूझता रहता है। उसे लगता है कि उसे कोई नहीं समझ सकता या वो सबके लायक ही नहीं है।
उनकी हेल्प करने के लिए सबसे पहले हमें बच्चों का विश्वास जीतना चाहिए जिससे वो खुल कर अपनी बात हमें बता सकें तथा कुछ अन्य तरीके आजमाकर भी हम उनकी सहायता कर सकते हैं जैसेकि - बच्चों के साथ समय बिताना, उनकी बातों को समझना व उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान देना, उनका मनोबल बढ़ाना व छोटी-छोटी उपलब्धियों पर उनकी प्रशंसा करना, उन्हें डायरी लिखने को प्रत्साहित करना, आर्ट,ड्राइंग व स्केचिंग करना, तनाव में रह रहे बच्चे के लिए हमें अपने घर के वातावरण को शांत बनाने का प्रयास करना चाहिए, उन्हें योग व मैडिटेशन के लिए भी प्रोत्साहित करें व बच्चों को यह विशवास दिलायें कि आप हर समय उनके साथ हैं। आप उनकी चिंताओं या समस्याओं को निपटाने में उनका साथ देंगें व सबसे अधिक कारगर समाधान है कि हम बच्चों का भरपूर प्यार व समय दें जिससे वो इस तनाव के जाल में फंसे ही नहीं।