Friday, April 25, 2025

क्षति 

जो कुछ भी कश्मीर घूमने गए लोगों के साथ हुआ उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। 

सरकार व लोगों के अनवरत प्रयासों, अनगिनत शहादतों, कठोर निर्णयों व अनेकों सालों के बाद कश्मीर में प्रशंसनीय प्रगति देखने को मिली। कुछ स्थानीय लोग सरकार की  नीतियों की निंदा करते रहे, कुढ़ते रहे, खिसियाते रहे, लोगों को गुमराह करते रहे और बदलाव भी देखते रहे। अंत में फिर न चाहते हुए भी अनेकों योजनाओं व मुख्य धारा से जुड़ने लगे।

यहाँ के लोगों को  कुछ ही दिनों में विकास, सुविधाएँ, रोज़गार,शिक्षा,व्यापार,कमाई, साफ़-सफ़ाई, पैसा, ख़ुशहाली, समृद्धि और अनगिनत लाभ देखने को मिले।  इनकी प्रगति को पूरे देश के साथ-साथ विश्व भी देख रहा था। यहाँ के मूल निवासियों के व्यापार चल निकले थे और लोग सम्पन्न हो रहे थे। ज़िंदगी जैसे तैसे बढ़िया ही चल रही थी। कमाई भी अच्छी हो रही थी। शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर लोगों को मिलने लगे। सभी प्रकार की सुविधाएं व योजनाएं इन लोगों को मिलने लगीं। एक आम आदमी अपने परिवार व बच्चों की खुशहाली ही तो चाहता है। 

पूरा देश यहाँ अमन चैन की दुआ करता रहता है।  

यहाँ के विकास व सुरक्षा को देख बाहरी लोगों के मन में भी एक विश्वास जगा और लोग हिम्मत करके सपरिवार प्रकृति व धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का आनंद लेने के लिए पहुँचने लगे थे। घर से चलते समय एक अनजाना डर मन में हमेशा  रहता ही था। फिर भी लोग पिछली सब घटनाओं को भूलकर पहुँच रहे थे।

इस घटना के बाद स्थानीय लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं। शहर बंद है।  लेकिन लोगों को अब काम-धंधों के बंद  होने का डर है। कुछ लोगों ने व्यापार बढ़ाने के लिए क़र्ज़ा भी लिया हुआ है। अब क्या होगा ? भविष्य अनिश्चित है। क्योंकि अब ग्राहक नहीं तो दुकान भी बंद। अब पता नहीं बाहर से आने वाले लोगों के मन में दुबारा विश्वास बनाने में न जाने कितना समय लगे। 

सोचिये अब आपको कमाई करवाने या आपका व्यापार बढ़ाने के लिए इतनी बड़ी क़ीमत शायद ही कोई चुकाए जो एक यादगार समय अपने परिवार के साथ बिताने की उम्मीद से आपके शहर आए निर्दोष व मासूम लोगों द्वारा पहलगाम में चुकाई गयी है। इस नुकसान की कोई भरपाई नहीं है। 

जल्दी ही समझने की आवश्यकता है कि अलग थलग रह कर कोई समाज विकसित नहीं  हो सकता।

आपसी प्रेम, विश्वास, सहयोग से ही आप जीवन को सुंदर बना सकते हैं किसी को जान-माल का नुकसान  पहुँचा कर नहीं। सतर्क रहें व अलगाववादी ताकतों को पहचानें। 

उम्मीद है अब शायद स्थानीय लोग समझें कि वो भी हिंदुस्तानी हैं, हिन्दुस्तान का ही हिस्सा हैं और हम सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। 

ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति व भटके लोगों को बुद्धि दें।