Thursday, January 22, 2026

 समाधान 

एक आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की जद्दोजहद में लगा रहता है और एक सकून भरी जिंदगी जीने के लिए के लिए टैक्स देता है और सरकार या महकमों से बेसिक सुविधाओं की आशा करता है। ये सुविधाएं वो कोई मुफ्त में नहीं लेता बल्कि उसका पूरा खर्चा भी टैक्स के रूप में खुद ही वहन करता है। इस टैक्स से ही इन महकमों में काम कर रहे लोग मोटी -मोटी तनख्वाहें लेते हैं। हमारे यहाँ कोई भी काम या किसी भी शिकायत की सुनवाई कोई न कोई बड़ी दुर्घटना के बाद ही होती है और उस सबका खामियाजा भी इसी टैक्सपेयर को अपनी जान-माल के नुक्सान से ही चुकाना पड़ता है। 

इन महकमों में काम कर रहे लोगों की ऐसी क्या मानसिकता है कि इनके कान पर कोई जूँ ही नहीं रेंगती और मजे की बात ये कि ये किसी बड़ी दुर्घटना के बाद भी नहीं जागते। पता नहीं किस बात का इन्तजार करते हैं ? 

हाल ही में भोपाल की सोसाइटी की लिफ्ट में हुई दुर्घटना व नोएडा की घटना इसका जीता जागता उदहारण है। पहले हुए हादसे की शिकायत लोगों द्वारा की जा चुकी थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नोएडा में हुए हादसे के समय  महकमें के सभी लोग दुर्घटना स्थल पर मौजूद थे पर कोई भी समाधान न निकाल पाए और बड़े ही सहज तरीके से सब कुछ घटित होते देखते रहे। 

किसी दूर दराज इलाके में संसाधनों की कमी या अन्य किसी कारण के कभी-कभी ऐसा हादसा हो जाता है लेकिन चमकती दमकती देश की राजधानी में ऐसा हादसा सिर्फ इन महकमों की लापरवाही ही दिखाता है। 

इस हादसे के साथ ही इन गगनचुम्बी ईमारतों में करोड़ों के माचिस की डिब्बी जैसे मकानों में रह रहे इन टैक्सपेयर व आम आदमी की क्या हालत है और उसकी जान कितनी सस्ती है ये कड़वी सच्चाई भी सामने आ गयी है। 

कभी मेट्रो, लिफ्ट,आगजनी, पानी, सड़क पर होने वाले हादसे, प्राकृतिक आपदाओं, अचानक हार्ट अटैक या इस प्रकार की किसी भी परिस्थिति या हादसों से बचने के लिए लोगों को कुछ बेसिक कौशल जैसे-तैराकी,फर्स्ट ऐड, साधारण टूल्स आदि का प्रयोग सीखना ही चाहिए। जिससे ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति किसी बाहरी सहायता का इंतज़ार न करे और समय रहते अपने साथ ही दूसरों की जान भी बचा सके। 

सरकारों को भी समाज में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को डिजास्टर मैनेजमेंट या आपदा प्रबंधन की बेसिक जानकारी तो अवशय देनी चाहिए। ऐसे हादसों से बचने के लिए स्कूलों व कॉलेज में ट्रेनिंग मिलनी चाहिए और इसे मेंडेटरी कर देना चाहिए व समय-समय पर इन हादसों में जान बचाने वाले लोगों को अपने अनुभव शेयर करने के लिए संस्थानों, सोसाइटी, पब्लिक प्लेसेस आदि में  बुलाना चाहिए व साथ ही  मॉक ड्रिल भी होनी चाहियें। 

इन हादसों से बचने के लिए महकमें के लोगों को जनता द्वारा मिली शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही करना चाहिए और सबसे बड़ी बात जान बचाने वाले किसी भी विशेष अधिकारी या व्यक्ति को आम जनता के बीच सम्मानित किया जाना चाहिए जिससे अन्य लोग भी उनके अनुभवों से कुछ सीख सकें। 

वैसे तो विपत्ति के समय संयम, चतुरता, अनुभव, साहस, विवेक और ज्ञान जैसे गुण ही व्यक्ति के सच्चे दोस्त होते हैं जो हर कठिन परिस्थिति में मनुष्य का साथ निभाते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।