संकल्प
कुछ कड़वे सच रोशन हो गये
कुछ दिये बुझा गया
बदनाम हो कर भी
ये साल अपना
नाम कमा ही गया ।
जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी
क्यूँ न नया आग़ाज़ करें
पूँजी मुट्ठी से यूँ ही फिसल रही
संजो कर अपने आस-पास धरें ।
कुछ दयालु और कुछ झुकना सीख लें
वक़्त से थोड़ा धीमें चलना सीख लें
ज़िंदगी को बेफ़िक्री से
और इसको जीने का लुत्फ़ लें ।
क्यूँ न इस बार
नये क़ायदे शुरू करें
धरती से प्यार करें
प्रकृति से कुछ लेने का ही नहीं
कुछ देने का भी संकल्प लें ।
चलिए आने वाले साल का
क्यूँ न
नयी उम्मीदों
ख़ुशियों व जोश से
इस्तकबाल करें ।
| HumHind 15 jan 2021 |