Friday, May 12, 2023


फ्री का सुख 

 मेरा पैर फिसल गया और हड्डी टूट गयी।लोग किसी तरह मुझे डॉक्टर के पास ले गये और घर वालों को सूचित किया।घर वाले प्लास्टर करवा कर घर ले आये।खूब सेवा होने लगी मेरी।जान पहचान के सब पूछने आते तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगता था।सब कुछ बिस्तर पर ही हाथों में मिल रहा था।अब धीरे-धीरे मैं भी यही चाहने लगा कि सब ऐसे ही मुझे पुच - पुच करते रहें और मैं कई बार दर्द या करहाने की ऐक्टिंग कर नये-नये बहाने बनाने लगा।सोते समय सोचता कि किसको अच्छा नहीं लगेगा ये सब । जब ठीक था तब घर- बाहर का सब काम करना पड़ता था और मम्मी-पापा से डाँट अलग पड़ती थी।अब तो इन दोनों के साथ-साथ पूरा परिवार ही जी हज़ूरी करता है पूरा दिन।ठीक हो जाने पर कौन पूछेगा।कमजोर होने का नाटक कर चाहता था कि ये सब लम्बा चले।मुझे अच्छे से समझ आ गया था कि कमज़ोर को सब पूछते हैं और मज़बूत को सारी ज़िम्मेदारी खुद ही उठानी पड़ती है।समाज भी कमजोर की सहायता उसके बिना माँगे ही कर देता है।

आज समाज का एक वर्ग कुछ ऐसे ही जीवन बिताना चाह रहा है।

सही बात है जब सब कुछ हाथों में मिलने लगे और उस पर भी फोकट का मिलने लगे तो कोई मेहनत मजदूरी कर मजबूत क्यों बनना चाहेगा।कल की कोई चिंता न हो कि बीवी बच्चों को रोटी कैसे मिलेगी या काम धंधा कैसे चलेगा तो फिर कोई कमजोर क्यों आगे बढ़ने की सोचे।पहले तो इसी चिंता में फिर भी लोग मेहनत मज़दूरी कर रहे थे लेकिन अब आटा,दाल,बिजली सब फोकट में मिल रहा है तो क्यों न सारा समय टिक-टोक में, बदमाशी में या भद्दे कामों में ही बिता लें । रोटी का इंतज़ाम तो सरकार ने कर ही दिया है। निकट भविष्य में भी सब फ्री का ही मिलेगा तो घाटे का सौदा तो नहीं है ये।इसके बदले में सरकार हमसे हमारी बेकार पड़ी वोट ही तो माँग रही है तो दे देंगें हम तो अपना वोट बिना कुछ सोचे समझे ही।

भई हमें तो अब यही समझ आता है कि हमें कमाने धमाने की कोई ज़रूरत नहीं है।अब तो हम आराम से घर पड़े मोबाइल देख कर देश की सेवा में अपना योगदान देंगे । 

आज देशवासी फ्री के चक्कर में लगे है।नासमझ व मासूम जनता बदले में देश द्वारा मिले अपने विशेष अधिकार का सौदा कर बैठी है।इसलिये चारों और कमजोर लोग ही दिख रहे हैं।लोग ऊपर उठना ही नहीं चाहते क्योंकि फिर उन्हें काम करके अपने परिवार की देखभाल करनी होगी।बिना हाथ-पैर हिलाये रोटी मिल रही है तो क्या करना है आगे बढ़ कर ।

सरकारों को लोगों का जीवन-स्तर ऊपर उठाने का प्रयास उन्हें फोकट में सुख सुविधाएँ उपलब्ध करा कर नहीं अपितु उन्हें रोज़गार,शिक्षा व अच्छा वेतन देकर करना चाहिये और लोगों को सम्मान से जीने के लिये प्रेरित करना चाहिये।  

देश की जनता किसी शिक्षित व्यक्ति को चुन कर कर देश की बागडोर इसी आशा के साथ उसे सौंपती है कि वह अपनी सूझ-बूझ से देश को प्रगति के पथ पर ले जायेगा व वह अपने प्रयासों से देश में चारों ओर ख़ुशहाली ले आयेगा।लेकिन इसके लिये उसके अंतर्मन का निष्कपट होना बहुत ही आवश्यक है।

कहते हैं सिंहासन देख अच्छे-अच्छों का मन डोल जाता है । लेकिन क्या अपने माता-पिता के संस्कार, स्वयं के जीवन मूल्य, आत्मा, जीवन के ऊसूल आदि शासक बनते ही इतनी जल्दी बेमानी हो जाते हैं ? 

लोगों को भी अपने अधिकारों का प्रयोग बहुत ही सोच-समझ कर करना चाहिये।आपका अधिकार आपको अपने लिये सुयोग्य,कर्मठ,ईमानदार,दयालु,दूरदर्शी शासक चुनने की असीम ताक़त देता है इसका इस्तेमाल अपने व देश की भलाई के लिये करें न कि फ्री के चक्कर में अपनी आने वाली पीढ़ी को आलसी व कमजोर बनाने के लिये ।