लक्ष्य
बहुधा जेईई मेन परीक्षा के बाद छात्रों का अगला लक्ष्य आईआईटी होता है। जहाँ आईआईटी को भारत का सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थान माना जाता है वहीँ आईआईटी प्रवेश परीक्षा (जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड) भारत की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक हैं। इस परीक्षा में हर साल दस लाख से अधिक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाते हैं। क्योंकि इन संस्थानों में छात्र स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद प्रतिष्ठित प्लेसमेंट और उच्च वेतन पैकेज प्राप्त करते हैं। इसलिये इन परीक्षाओं में कड़ी मेहनत, सुनियोजित तैयारी और भारी मानसिक दबाव को झेल पाने की क्षमता की आवश्यकता होती है। जो छात्र इसकी तैयारी योजना बनाकर व संतुलित तरीके से करते हैं वे जेईई एडवांस को क्रैक कर पाते हैं।
परीक्षा पास करने के बाद अगला पड़ाव सर्वश्रेष्ठ आईआईटी में सर्वश्रेष्ठ शाखा प्राप्त करना है। आजकल, छात्र उच्च वेतन पैकेज के लिए कंप्यूटर विज्ञान, डेटा विज्ञान, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग या संबंधित क्षेत्रों जैसी शाखाओं में अधिक रुचि रखते हैं और यह मुख्य रूप से परिवार और दोस्तों द्वारा दी गयी सलाह के कारण होता है। इस प्रकार की सलाह या सुझावों से छात्रों की कोई विशेष मदद नहीं हो पाती है क्योंकि कई छात्र अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं के बारे में उत्साहित हो सकते हैं लेकिन अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से भारी अपेक्षाओं के कारण वे इन शाखाओं का चयन करने के लिए मजबूर होते हैं। दवाब में ली गयी कोई भी शाखा या स्ट्रीम छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
दूसरी ओर कई छात्र जो आईआईटी प्रवेश परीक्षा में कम रैंकिंग के कारण अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं को लेने के लिए मजबूर हैं, वे व्यक्तिगत आईआईटी में शाखा परिवर्तन विकल्पों के लिये प्रयासरत रहते हैं और अपने पहले दो सेमेस्टर में छात्रों पर अपने बैचमेट्स की तुलना में बेहतर ग्रेड प्राप्त करने के लिए भारी मानसिक दबाव होता है ताकि वे शाखा परिवर्तन के लिये मिले अवसर का उपयोग कर सकें और अपनी वांछित शाखाएं प्राप्त कर सकें।
इन सभी अस्वास्थ्यकर प्रतियोगिताओं के कारण छात्रों पर भारी तनाव होता है। जो धीरे-धीरे हमारे देश के सर्वश्रेष्ठ युवा दिमाग के बीच मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को विकसित करता है। छात्रों के साथ नियमित बातचीत के रूप में पाया गया कि हाल के वर्षों में आईआईटी छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा तेजी से बढ़ा है। इसलिए सभी आईआईटी छात्रों की सतत निगरानी के लिए अपने यहाँ विभिन्न आंतरिक समितियों का गठन करने के साथ-साथ मजबूत परामर्श प्रकोष्ठों , मानसिक स्वास्थ्य इकाइयों, योग और ध्यान केंद्रों आदि को विकसित करके इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से संभालने की कोशिश कर रहे हैं और इनके परिणामस्वरूप छात्रों के बीच अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा महसूस की गयी जिससे उन्हें मानसिक तनाव से उबरने में मदद मिली।
इसीलिए कहा जाता है कि प्रिवेंशन इस बेटर देन क्योर। यदि आप खुद को इस हानिकारक दौड़ में नहीं डालते हैं तो आप जेईई के दौरान या आईआईटी में स्नातक होने के दौरान अपने मानसिक तनाव को कुशलता से संभालने में सक्षम हो सकते हैं ।
आपको विश्वास होना चाहिए कि आईआईटी प्रवेश केवल आपके जीवन का लक्ष्य नहीं है।आईआईटी में मौका मिले तो ठीक है, लेकिन अगर नहीं तो चिंता न करें। अगर आपको इंजीनियरिंग की पढ़ाई का शौक है तो कोई भी अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज आपका सपना पूरा कर सकता है। यदि आप अपने इंजीनियरिंग अध्ययन के बारे में उत्साही हैं, अकादमिक पाठ्यक्रम के बारे में गंभीर हैं और कड़ी मेहनत करते हैं तो कोई भी आपको उत्कृष्ट प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकता है।
![]() |
| HHdstni 23/02/2024 Pg-45 |
.png)
