बातचीत - जेईई , आईआईटी , कोटा , तनाव , अनावश्यक।
* मैं अक्सर सोचता था कि अगर मैं आईआईटी पास नहीं कर पाया तो मेरी जिंदगी खत्म हो जाएगी पर यह सच नहीं है। मैंने अपने स्कूल के दिनों में कोटा के बारे में बहुत कुछ सुना था कि अगर आप आईआईटी या किसी अन्य शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज में जाना चाहते हैं तो इसकी तैयारी के लिये यह सबसे अच्छी जगह है और यहाँ पढ़ना मेरा भी सपना बन गया।
आज मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ पर क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे यदि मैंने आपको बताया कि मेरे जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था जब मैंने आत्महत्या पर विचार किया था।
मैं अपने इस सपने को सच करने के लिये दो साल के लिए कोटा शिफ्ट हो गया। मैं एक कम आत्मविश्वासी और अंतर्मुखी छात्र था जबकि यहां हर दूसरा छात्र टॉपर था और प्रतियोगिता बहुत बड़ी थी। कोटा में कोचिंग कक्षाएं छात्र के प्रदर्शन के अनुसार बैचों में विभाजित की जाती हैं। नियमित अंतराल पर परीक्षण होते हैं और स्कोर के आधार पर प्रत्येक छात्र को बैच में डाला जाता है। एक बार जब मैंने कोचिंग कक्षाएं शुरू कीं तो मैंने देखा कि मेरी रैंक लगातार गिर रही है। हर परीक्षण का मतलब था मेरा निचले बैच में शिफ्ट होना। इससे मेरे आत्मविश्वास का स्तर बुरी तरह प्रभावित हुआ। मैं सोचने लगा कि अब मैं जेईई की परीक्षा पास नहीं कर पाऊंगा।
मेरे स्कोर को बेहतर बनाने के लिए मेरा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। यहाँ शिक्षकों के पास छात्रों के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने का समय नहीं है। वे हमेशा जल्दी में रहते हैं। एक कक्षा से दूसरी कक्षा में भागते हैं। मैं बहुत हतोत्साहित हो गया था। मेरे माता-पिता ने मुझे ज्यादा चिंता न करने के लिए कहा। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि मैं भविष्य में आर्थिक रूप से आरामदायक जीवन जीने में सक्षम रहूंगा भले ही मैं आईआईटी में अपना स्थान नहीं बना पाऊं। लेकिन उनके कुछ भी कहने से मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा। शायद मैं तब इतना समझदार नहीं था। मैंने उन पर ध्यान नहीं दिया और डिप्रेशन में गिरता चला गया ।
तभी मैंने एक काउंसलर की मदद ली। उन्होंने मुझे एहसास दिलाया कि आईआईटी या किसी प्रतियोगी परीक्षा में पास होना जीवन का अंत नहीं है। किसी तरह काउंसलर ने जो कहा वह मुझे समझ में आया। शुक्र है यह पहली और आखिरी बार था जब मुझे इस तरह के विचार आए थे। यह एक बेहद तनावपूर्ण समय था जिसका मैंने पहले कभी सामना नहीं किया था। आज मैं एक निजी कंपनी के साथ काम कर रहा हूँ और मेरे काम में भी कई बार ऐसा होता है जब मैं दबाव में होता हूँ लेकिन एक युवा उम्मीदवार के रूप में जो दवाब मैंने महसूस किया था उसकी तुलना में यह कुछ भी नहीं है।
मुझे अपने कार्य स्थल का माहौल व यहाँ का जीवन पसंद है। यहाँ मेरी कम्पनी में आईआईटी के कई लोग मेरे साथ काम करते हैं और हमारे बीच कोई ख़ास अंतर नहीं है।
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* मुझे लगा कि अगर मैं आईआईटी में नहीं गया तो मेरी जिंदगी खत्म हो जाएगी। मैं बहुत गलत था। मैं अपनी कक्षा के शीर्ष पांच छात्रों में से एक था। मैं अपने शिक्षकों का पसंदीदा छात्र था जो वाद-विवाद, संगीत और खेल में उत्कृष्ट था। मैंने सोचा कि जीवन में कुछ बनने के लिये मेरे पास वह सब कुछ है और शुरू से ही मेरी निगाहें आईआईटी पर टिकी थीं। लेकिन यह सब तब बदल गया जब मैं दसवीं कक्षा के बाद कोटा पहुंचा। वहां जा कर मुझे मालूम पड़ा कि मुझे पहले ही काफी देर हो चुकी है क्योंकि वहाँ छात्र आईआईटी-जेईई परीक्षा के लिए कक्षा 5 से ही पढ़ाई शुरू कर देते हैं।
मैं एक साल तक कोटा में था और हर पल ऐसा लग रहा था जैसे मैं ऐसी दौड़ में शामिल हो गया था जहाँ मेहनत से ज्यादा मानसिक तनाव था। छात्र पूरे दिन अपने कमरों में बंद रहते थे। उनकी किसी को दोस्त बनाने में दिलचस्पी नहीं थी। पहले दो महीनों के लिए मुझे उस माहौल में बहुत घुटन महसूस हुई क्योंकि मैं बाहर रहना पसंद करता था। लेकिन मैंने अपने साथियों को देखा और वे सभी इस माहौल में एक दूसरे के साथ सहज थे। मेरे पास सिर झुकाकर पढ़ाई करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने अपने परीक्षणों में कम अंक प्राप्त करना शुरू कर दिया। मेरा आत्मविश्वास इतना कम हो गया कि मैंने धूम्रपान और शराब पीना शुरू कर दिया। मेरा स्तर लगातार नीचे गिर रहा था। आखिरकार यह इतना बुरा हो गया कि मैं दो साल के अंत में मुश्किल से अपनी कक्षा 12 की परीक्षा पास कर पाया। रिजल्ट आने के बाद मेरे माता-पिता मुझे वापस घर ले गए। मैं इस समय पर इतना बिखर गया था कि मैं अपने पड़ोसियों, दोस्तों या परिवार में से किसी का भी सामना नहीं कर सकता था। मुझे एक हारे हुए व्यक्ति की तरह महसूस हुआ और मैंने हर किसी से अपना संपर्क समाप्त कर दिया। मेरा खुद पर से भरोसा पूरी तरह से उठ चुका था। शरू से टॉपर रहे व्यक्ति के लिये ये स्वीकार करना नामुमकिन था कि वह बड़ी ही मुश्किल से अपनी बारहवीं की बोर्ड परीक्षा पास कर पाता है। यह मेरे लिए बहुत शर्मनाक था।
मुझे खुद को दूसरा मौका देने में एक साल लग गया। मैंने अपने शहर के एक स्थानीय कॉलेज में प्रवेश लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद मैंने एमबीए किया। धीरे-धीरे मेरा आत्मविश्वास वापस आ गया। मुझे अपनी पहली नौकरी एक निजी बैंक में मिली। आज मैं अच्छा पैसा कमाता हूं और मेरे पास दोस्त हैं,परिवार है यानि वह सब कुछ है जो मैं अपने जीवन से चाहता था...जब मैं छोटा था। आज जब मैं कोटा में अपने दिनों को देखता हूं तो मुझे लगता है कि मैंने अपने साथ जो किया वह पूरी तरह से अनावश्यक था।